“कुछ क्षणोंपरान्त वो एक दरवाजे के पास पहुँच कर ठिठके।“यही है….”एक बार फिर लॉक में वही चमचमाती तार प्रवीष्ट हुई।‘टिक्क्….’“खुल गया…..”-बेहद फुसफुसाती आवाज।दरवाजे को खोलकर दोनों भीतर दाखिल हुये। अंदर पूरी तरह धुप्प् अँधेरा था।“अबे……टॉर्च तो जला”‘टिक्क्’कमरे में रोशनी का एक गोला उभरा।“तिजोरी किधर है?”रोशनी का गोला कमरे की दिवालों पर भटकने लगा।एकाएक,“ये है….”हल्की पगचापों की आवाज के साथ वो तिजोरी तक पहुँचे।“बैग खोल और सारे औजार निकाल….”‘किर्रsssssss’चैन खुलने की आवाज।‘किट्ट्…पट्ट्….धप्प्….धुप्प्…….’कमरे में कुछ देर तक इसी तरह की आवाजें गूँजती रहीं। अगले पन्द्रह मिनटों में दो काम हुये,पहला- तिजोरी को खोला गया,दूसरा- तिजोरी में जो कुछ भी था, उसे बैग के हवाले किया गया।पन्द्रह मिनट गुजरने के ठीक बाद,“काफी माल है….अब तो ऐश ही ऐश….”“पहले यहाँ से निकल…..”दोनों ने दरवाजा बंद किया और गलियारे में आ गये। गलियारे से गुजारते हुये एक खिड़की के पास, दोनों के पाँव जहाँ के तहाँ थम गये। कारण? XXXBF मुम्बई के जुहू बीच पर बना एक खूबसूरत बंगला, रात के लगभग डेढ़ बजे का वक्त, बंगले के चारों तरफ 6 फिट ऊँची बाऊन्ड्री-वॉल. पुरूषों के शरीर की सबसे बड़ी भूख और कमजोरी, लड़की।“क्या माल है?…..”कमरे के भीतर बेड पर कोई सो रही थी।“एकदम हिरोईन…”“कितनी गोरी है साली…..चाटने लायक…”“चड्ढी दिख रही है…….”“ये बड़े घर की लड़कियाँ गड़कटी कच्छी क्यों पहनती हैं बे…..देख के दिमाग की माँ-बहन एक हो जाती है…”“इसकी गाँड़ कितनी चिकनी और मोटी है……ऐसा माल हमारी















