“अहह!”अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- “ख्याल तो बहुत हैं, पर क्या करूँ, थोरी शरम भी तो आती है!” मैं भाभी की चुचियों को ब्लाउस के अंदर ही हाथ डालकर आहिस्ते से दबा रहा था. एक झटके में चूत के बिल्कुल अंदर तक जाता था.और फिर हाथ के बल कमर को बिल्कुल उठाकर, सूपदे को चूत के मुँह पर ले आता था. XXX Hindi मैं अपने चेहरे पर की मुस्कुराहट को चाह कर भी नही रोक सकता था…सारी दुनिया मेरेलिए दूर जा रही थी….बस भाभी की आँखें, और उनके चूत के गहराई में जाता और फिर निकलता मेरा लौड़ा.अब तो मस्ती ऐसी कि मुझ से सहा नही जा रहा था. फिर अपने रेशमी ब्लाउस को. मेरे लोड्े ने अब धीरे रफ़्तार से ही, पर लंबे, और कुच्छ जोरदार धक्के लगाने शुरू किए. भाभी आँखें मूंदी ही हुई थी, पर मुस्कुराते हुए पूच्ची, ” क्यूँ, नही रुका जाता क्या?”मैने अपना सर हिलाते हुए कहा, “नही, पर मज़ा बहुत आ रहा है… अहह.”“हान्न्न, मुझे भी, मेरे राजा. फिर से एक बार यह ख्याल आया की रीना भाभी वाक़ई में लौड़े को चुस्ति या चाटती नही है.ये तो लौड़े को अपने मुँह से चोदती हैं, ये तो चोदने का पूरा मज़ा अपने होंठ और जीभ से ही दे देती हैं.















