बाबुजी ने कुछ किया तो नही ना.”वो हल्के से हँसी “वो मेरे ससुर है उनकी मर्जी, और आप को कैसे फिक्र हो रही है मेरी, अभी तक कहा थे.”खुशबू मुझे जलाने का कोई भी मौका नही छोड़ती थी“ठीक क्या रहेंगे वो, मेरे आते ही छेड़छाड़ शुरू कर दिए, कल से बस धोती पहने घूम रहे है घर में.”“वो तो घर में धोती ही पहनते है ना.”“हाँ लेकिन अंदर तो कुछ पहनते है, अभी तो बस जानबूझ कर मुझे अपना सामान दिखाते फिर रहे है.”खुशबू की बात से मैं थोड़ी देर को चुप हो गया, समझ ही नही आ रहा था की क्या जवाब दु.“क्यो चुप हो गए… ऐसे उनका हथियार है तो जानदार, आपसे तो डेढ़ गुना होगा.”खुशबू की हँसी से मेरे दिल में अजीब सी कसक उठी लेकिन दिल के किसी कोने में एक अजीब सा अहसास भी हुआ मानो मैं इन बातो से उत्तेजित हो रहा था, मेरी बीवी किसी गैर के हथियार की तारीफ कर रही थी वो भी मेरे सामने.“क्या सोच रहे हो.”खुशबू की आवाज ने मेरा ध्यान भंग किया “कुछ कुछ भी तो नही” मैं थोड़ा हड़बड़ाया.“ये तो नही सोच रहे हो की अगर वो मेरे अंदर गया तो मुझे कैसा लगेगा, ऐसे सच बताऊ दिन भर से मैं यही सोच रही थी हा हा हाँ.”खुशबू ने एक ठहाका मारा, लेकिन ये मेरे लिए कोई खुसी की















