मैं शाम ६ बजे उनके घर पर पहुच गयी. जोर जोर से मेरे दोनों होर्न वो बेरहमी से दबाते रहे. XXX Hindi मैं बहुत तड्प रही थी की इतने में शुक्ला सर ने एक और धक्का ढेल दिया.उनका ८ इंच का लंड मेरी चूत पर बिना कोई रहम किये अंदर घुस गया. मैं बाहर ही रुक गयी. सर एक ओर जहाँ मेरे रसीले होंठों को पी रहे थे , वही मेरी छातियों को छु, सहला और हल्का हल्का दबा रहें थे.आज एक मर्द की छुअन से मेरी अंडर की एक जवान होती औरत जाग चुकी थी. बस ऊपर उठा दी. इसी स्किर्ट को उपर करके मैं मुठ मार रही थी.काजल! मैं चिल्ला न सकू. मैंने उनका नंगा सीना , सीने पर उनके सफ़ेद काले मिले गुन्घ्राले बाल देख लिए. मैंने घंटी बजायी. दोस्तों आधे घनटे तक सर मेरे दोनों मम्मो को पीते रहें. मैं उस दिन एक गुलाबी रंग की कुर्ती पहन रखी थी. इसी स्किर्ट को उपर करके मैं मुठ मार रही थी.काजल! मैं भी अपने गुरूजी से चुदने लगी. अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- उछ !! मैंने सर से कहा.















