दरअसल में फूफा ने चाट चाट कर मम्मी की फांकें चौड़ी कर दी थी फूफा अपना लंड घुसाने की कोशिश कर रहा था मगर मम्मी हिल जाती थी.मम्मी ने ३-४ बार कहा की भाई जी मुझे बक्श दो मेरे बस का नही है,पर फूफा का काला लंड लगातार हिल रहा था, आखिर फूफा ने मम्मी की दोनों टाँगें बाएं हाथ से पकड़कर और दुसरे से अपना लंड पकड़ कर मम्मी की फंको के बिच में रखकर जैसे ही धक्का मारा मम्मी की चीख निकल गयी.फूफा ने कहा माया मेरी जान क्या हुआ ,मम्मी ने कहा की बहुत मोटा है,फूफा ने मम्मी की बात अनसुनी कर दी और अपने लंड को धीरे धीरे अंदर करने लग गया ,मम्मी लगातार सिसक रही थी,और फूफा के काले मोटे मोटे चुत्तड़ तेजी से आगे पीछे हो रहे थे.फूफा ने अपने दोनों हाथ मम्मी की छाती पर टिका दिए थे और सहला रहा था, फूफा लगभग पंजो पर उकडू उठा हुआ था,और उसका काला लम्बा मोटा लंड मम्मी के अंदर बहर आ जा रहा था.मै मम्मी की सिस्कारिया सुन रहा था ,मम्मी आह,आह,आह,………। बस,बस, ….बोल रही थी मम्मी का छेद लगभग २ इंच गोल हो गया था.मम्मी की ऐसी सेक्सी आवाज मेने पहले कभी नहीं सुनी थी ,मम्मी की आवाज मुझे ऐसी लगी जैसे कुतिया का छोटा बच्चा ठण्ड के मारे घुट घुट कर रो रहा हो















