पहली बार मैं किसी प्रसंग को कहानी का रूप देने की कोशिश कर रही हूँ. BFSex अनायास ही मेरे होठ हर्षिता के काँपते होठ की ओर बढ़ने लगे. उन्होने आज भी स्वयं को बहुत संभाल कर संवार कर रखा है. मेरे जीभ ने वो काम शुरू कर दिया था जिसमे उसे महारत थी.मै चूत रस का आशिक हूँ. उससे नीचे उतरने पर आया प्यारे चूत का नंबर जो मेरे इंतज़ार मे पहले ही पानी पानी हो रही थी.मेरे जीभ ने जैसे उसके तपते एहसासो को ठंडक दे दी. कपड़ो के अलग होते ही हर्षिता ने मेरे पूरे बदन पर चुंबनो की झड़ी लगा दी. चुत और लंड के टकराने से एक मद्धम संगीत निकल रहा था जो इस कामुकता मे और चार चाँद लगा रहा था.उस पर कामुक आहे आग लगा रही थी. दोनो को बारी से मर्दन करते हुए इश्क की आग मे मै उन्हे लिए जा रहा था. वो रसोई की ओर गयी और तभी बाहर बारिश होने लग गयी. हम तृप्त थे फिर भी अभी तड़प शेष थी.दोनो नंगे ही आजू बाजू लेट कर बाते करने लगे. कॉन्डोम लेने जा रहा था वो विचार खो सा गया और मेरे हाथ अब हर्षिता के उन्नत उरोजो पर बढ़ चले.










