अभी हाथ से मार रहा है और फिर लण्ड से इसको धुनेगा।‘बुर चोदी… तेरी गाण्ड है ही इतनी मस्त कि मेरा लौड़ा अपने आप रास्ता भटकते हुए तेरी गाण्ड में चला जाता है।’ इतना कहकर भैया हँसने लगे और भाभी भी ओ-आ-ओ कर रही थी।तभी भैया बोले- आज बुर और गाण्ड एक साथ ही चोद देता हूँ, काफी थक गया हूँ…‘हाँ यार, थक तो मैं भी गई हूँ। जल्दी से दो-चार धक्के मेरी गाण्ड में भी लगा दो, मुझे भी बहुत नींद आ रही है, भाभी बोली।इतना सुनते ही भैया बोले- तो ठीक है गाण्ड ढीली छोड़।‘यार मेरी गाण्ड को खोल कर के थोड़ी चाट भी लो ताकि सुरसुराहट कम हो जाये।’भाभी के इतना बोलते ही भैया ने अपना लण्ड निकाला और भाभी की गाण्ड को थोड़ा सा ढीला किया और अपनी जीभ वहाँ लगा दी। उनको इस तरह करते देख पता नहीं मेरी उंगली कब मेरी योनि के अन्दर चली गई और मैं कब झर गई, मुझे पता नहीं चला।जब मेरा हाथ पूरा गीला हो गया तब पता लगा कि मैं भी झर चुकी हूँ। जब मैंने अपना हाथ देखा तो वो पूरा मेरे रस से सना हुआ था। भैया की बात मेरे कानों में गूंज रही थी ‘पूजा, तेरा रस तो बहुत मजेदार है।’ और पता नहीं कब मेरी हथेली मेरी मुँह के पास आ गई और मेरी जीभ हथेली











