उसकी चूत के अंदर ऊँगली डालने के बाद भव्या ने दूसरे हाथ कि ऊँगली अपने अंदर डाल ली और एक ही लय में दोनों हाथ हिलाने लगी.भव्या : “ऐसे सिर्फ आँखे बंद करने से कुछ नहीं होगा, तू किसी के बारे में सोच, ऐसे किसी लड़के के बारे में, किसी हीरो के बारे में जिसके लंड को तू इस समय अपने अंदर महसूस करना चाहती है, और मेरी ऊँगली को वही लंड समझकर मजे ले बस”.बंद आँखों के पीछे आरोही ने काफी कोशिश कि पर ऐसा कोई भी इंसान उसकी सोच में नहीं आया जिसके बारे में सोचकर वो इस पल का मजा ले सके, उसने तो आजतक किसी के बारे में ऐसा नहीं सोचा था और ना ही किसी के लंड कि तरफ कभी देखा था.पर आज तो उसने अपने आदित्य पापा का लंड देख लिया, पहली बार लंड देखा और वो भी अपने बाप का, और उनके लंड के बारे में सोचते ही आरोही के शरीर में एक अजीब सी ऐठन आने लगी और वो भव्या कि ऊँगली को आदित्य पापा का लंड समझ कर उसके ऊपर लहराने लगी..और मजे कि बात ये थी कि भव्या भी आदित्य के लंड के बारे में ही सोचते हुए मास्टरबेट कर रही थी.















