मुझे ऐसी ही लड़की पसंद थी.दिन रात पूजा को ख्वाब में देखता, जब उसके घर जाता और या तो कभी वो बाहर मिलने आती, तो मैंने हाथ तक की पकड़ता था. और मैं उसके पेंटी में हाथ घुसा दिया, वो चहक उठी.आह आह आह आह आह मेरा लंड तो तन गया था, मेरी साँसे तेज तेज चलने लगी. XXXBF फिर पेटीकोट भी खोल दिया, गजब की पेंटी जो की झिल्लीदार पहनी थी, ओह्ह्ह्ह मेरा रोम रोम खड़ा हो गया, अंदर बिजली का करंट सा लगा, मैंने उसके पेंटी के ऊपर से ही अपनी नाक लगा कर उसके चूत की खुशबु का आनंद लेने लगा.वो मचल रही थी, वो मेरे बाल को पकड़ कर हटाने की कोशिश कर रही थी, मैंने उसके पेंटी को उतारने की कोशिश की, वो शर्मा गई, मैंने कहा अरे मुझसे क्या शर्माना, वो बोली धीरे धीरे नार्मल हो पाऊँगी. और मैंने पूरी बोतल एक बार में ही पि गया, वो बेड पे बैठ गया, पूजा रो रही थी. वो डरते हुए और कांपते हुए बोली, अनमोल…….















