मस्त देसी लड़की की आँखों की पलकों का खेल

अब मुझे गली के मर्द अच्छे लगने लगे थे, मैं सबको कातिल निगाहों से देखती थी, मेरा शौहर सुबह ही काम पे चला जाता था और मैंने दिन भर सब को घूरते रहती थी.जिस औरत को खुश देखती थी उससे मुझे जलन होने लगा था, मैं अपने भाग्य को कोस रही थी, पर कुछ चारा ही नहीं था, मेरे घर हम दोनों के अलावा मेरा ससुर भी रहते थे, उनका नियत ठीक नहीं रहता था मेरे प्रति और पड़ोस में रहने बाली औरत के प्रति, हमेशा वो हवसी निगाहों से घूरते रहता था. पर उस बूढ़े जिस्म में एक मदमस्त भूखी शेरनी के लिए कम था, मुझे और जोर जोर के झटके चाहिए थी, अब मुझे गुस्सा आने लगा, क्यों की वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पा रहा था.मेरे मुह से सिर्फ और जोर से और जोर से आवाज निकल रहा था, फिर थोड़े देर बाद मेरा ससुर झड़ गया पर मैं संतुष्ट नहीं हुयी थी. XXXBF अब मुझे गली के मर्द अच्छे लगने लगे थे, मैं सबको कातिल निगाहों से देखती थी, मेरा शौहर सुबह ही काम पे चला जाता था और मैंने दिन भर सब को घूरते रहती थी.जिस औरत को खुश देखती थी उससे मुझे जलन होने लगा था, मैं अपने भाग्य को कोस रही थी, पर कुछ चारा ही नहीं था, मेरे घर हम दोनों के अलावा मेरा ससुर

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