ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.और अमीषा दी के बूब्स मनोहर के पीठ पर गढ़ जाते है मनोहर भी रिंकू की तरह घर तक दी के मज़े लेता जाता है और घर आ जाता है और दी उसे अंदर आने के लिए कहती है पहले तो वह मना करता है दी बोलती है में चाय बड़ी अच्छी बनती हूँ तो वह बाइक लगा कर दी के साथ घर आ जाता है और दोनों अंदर आ जाते है दी उसे बैठने के लिए बोलती है और खुद पहले रूम में जाकर अपना बैग रखती है और किचन की और चल पडती है.वहां मनोहर सोफे पर बैठ कर अमीषा दी के बूब्स वाले सीन को याद करके अपने लंड को शांत कर रहा था उसने दी को आवाज लगाई दी आज आंटी नज़र नहीं आ रही तो अमीषा दी उसको बोलती है माँ नाना के घर गयी है अब मनोहर को लगा की उसके पास एक अच्छा मौका है आज क्यूंकि ना तो आंटी है और ना ही शेखर तो वह भी किचन की तरफ चल पडता है.वहां दी चाय बना रही होती है और मनोहर दी के एक दम पीछे खड़े हो जाता है और दी के गांड को निहारने लगता है.















