भारतीय वैलेंटाइन डे का सेक्सी मज़ा

फिर अंकल ने भी अपना माल मेरी गांड में गिरा दिया और सुस्ताने लगे। फिर कुछ देर के बाद उन्होंने मेरी गांड में लंड घुसाया और कम से कम आधा घंटा तक मेरी गांड मारी उस दिन के बाद से अंकल रोज दोपहर में मेरी चूत और गांड मारने लगे। उन्होंने मुझे play station तो दिलाया ही मुझे चॉकलेट और पैसे भी देते थे।लेकिन उन्होंने मेरी चूत गांड और चुचियो का साइज़ शादीशुदा औरत के जैसा बना दिया था।अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- मेरा नाम दामिनी है और मैं 18 वर्ष की हूँ और यह बात पहले की है। मेरे पड़ोस में मेरे पापा के दोस्त अखिलेश रहते थे, उनकी बेटी सुधा मेरी सहेली भी थी। मैं रोज शाम को उनके घर पर सुधा के साथ खेलने और अंकल से कम्प्यूटर पढ़ने जाती थी। Girl Sex Painसुधा के साथ खेलने बाद मैं उनके घर के थर्ड फ्लोर पर अंकल से कम्प्यूटर पढ़ने चली जाती थी। अपने घुटनों में गठिया होने के कारण आंटी सीढ़ियों पर चढ़ नहीं पाती थी इसलिए वो ग्राउंड फ्लोर पर ही रहती थी। अंकल मुझे बहुत ही मानते थे, मुझे अक्सर अपनी गोद में बिठाकर मुझे चॉकलेट खिलाते थे।उनकी गोद में बैठने के थोड़ी देर के बाद मुझे अपनी नितम्ब में कुछ कड़ापन महसूस होने लगता था, शुरू में तो मैंने इस बात पर ज्यादा नोटिस नहीं

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