मेरे मम्मे बार बार बड़े और छोटे होने लगे. XXX BF कोई भूचाल सा मेरी चूत में आ गया था.मैंने कमर में एक बड़ी सेक्सी करधन पहन रखी थी. मैंने सोचा भी नही था की लडकियाँ बैठके भी चुदवा सकती है.इस तरह भी काफी मजा मिल रहा था. मैं रणविजय का सारा माल पी गयी और एक भी बूंद बेकार नही जाने दी. रणविजय जान गया था की मैं उसको चूत दे दूंगी. मेरी जान !! क्यूंकि एक अजीब की हलचल हो रही थी. मैं किसी पेट की लचीली डाली की तरह रणविजय के लौड़े पर खेलने लगी. अपनी शाम रंगीन कर लो!! सारी शर्म हया को मैं छोड़ दिया.‘ले पी ले छिनाल!! मैं टांग फैलाकर कीसी छिनाल की तरह अपने बेस्ट फ्रेंड विधि के भाई रणविजय को अपनी चूत पिला रही थी. दोस्तों, फिर रणविजय ने उँगलियों से मेरी चूत की एक एक कली खोल दी और मुँह लगाकर मेरी चूत बड़े मजे से पीने लगा. तभी मेरा आशिक रणविजय मेरे कमरे में फिर से आ गया. हाँ!! मैंने रोने लगी. मैं उस पर लेट गयी और लेटे लेटे चुदवाने लगी. उसने ऐसा ही किया. दोस्तों, अब तो और जादा मीठी मीठी रगड़ मेरी चूत में लगने लगी.उसने मेरी दोनों टाँगे आपस में जोड़ दी थी और घपा घप मुझको चोद रहा था. रणविजय से लौड़ा मेरी चूत से निकाल लिया.‘चल मीरा !!















