साथ में चोदते हैं इस माँ की लौड़ी तबससुम मैडम को!”सुरिंदर की बात मुझे समझ नहीं आयी कि दोनों कैसे एक साथ मुझे चोद सकते हैं। पिछले तीन-चार दिनों में इंटरनेट पे जो मैंने कुछ-एक ब्लू-फिल्में और गंदी तसवीरें देखी थी तो उनके हिसाब से तो मुझे लगा शायद अनिल मेरे मुँह में लंड डाल कर चुसवायेगा। लेकिन जब मुझे उसके हाथ पीछे अपने चूतड़ों पे महसूस हुए और फिर अगले ही लम्हे उसके लंड का सुपाड़ा अपनी गाँड के छेद पे महसूस हुआ तो मेरी साँसें हलक़ में ही अटक गयीं।“हाय अल्लाह! XXXBF इसको चोदने लगे हो बाबू…. अल्लाह् के लिये ये ज़ुल्म ना करो… मैंने वहाँ कभी नहीं करवाया पहले…. मुझसे छुपाओ मत और खुल के बताओ कि प्रॉब्लम क्या है?”इस पर सुहाना फूट-फूट कर रोने लगी। तब फ़ातिमा बोली, “त़बस्सुम मैम मैं आपको बताती हूँ कि प्रॉब्लम क्या है। आप तो जानती हैं कि हमारी बस में कितनी भीड़ होती है और हमें पीछे खड़े हो कर जाना पड़ता है!”“हाँ! करीब तीन साल पहले मैं अठाइस साल की ही थी जब मेरे शौहर की सड़क हादसे में मौत हो गयी। तब हम दिल्ली में रहते थे। उसके दो-तीन महीने बाद दिल्ली का मकान किराये पे दे कर मैं मेरठ से थोड़ी दूर अपने पेरन्ट्स के साथ आकर रहने लगी। मैं अच्छे खानदान से हूँ और पैसे की कोई कमी नहीं















