लेकिन जैसे ही मेरी सास उनके कमरे से बाहर आई तो पिताजी बस उनको ही देखते ही रह गये.शादी मे कभी ठीक से देख भी नही पाए पर अब पिताजी तो जैसे मेरी सास को ही देखे जा रहे थे. BFSex उनको इस बात की उम्मीद नही थी. धीरे धीरे कमर आगे पीछे भी कर रहा था. नाम करण का अच्छा प्रोग्राम रखा गया प्रोग्राम दोपहर मे रखा ताकि मेहमान सुबह आकर शाम तक वापस जा सके. पर मेरी सास को ये पता नही था वो तो बस अपना स्टॉप आने का इंतज़ार कर रही थी.सब अच्छा ही चल रहा था. मैं तो बस देखती रह गयी. उनको समझ मे नही आया कि ये जान बुझ कर हुआ कि अंजाने में जब वो खड़ी हुई तो पिताजी से आँखे नही मिला रही थी. मेरी सास और पिताजी के बीच मे कुछ लोग आ गये. सबकी रज़ामंदी से हम दोपहर को शॉपिंग करने चले गये मेरी ननद तो कुछ ज़्यादा ही खुश थी.उनको शॉपिंग करने जो मिलेगा विकास कुछ काम से पहले मार्केट चले गये उन्होने कहा कि वो हमे वही मिलेंगे हम सब बस से मार्केट चले गये. मेरी सास मेरे यहाँ ही रुकी थी. विकास मेरी ननद और मेरी सास तो बहुत ज़्यादा खुश थे.










