वो दोनो हड़बड़ा गयी माफी मांगने लगी मैंने सेठ को बताने का बोला प्रज्ञा भाभी …नही भैया बात घर तक पहुच जाएगी ये लेलो वो साड़ी देने लगी.जब मैं नही माना तो प्रज्ञा …अब मैं क्या करूँ आप बताओ मैं (उसकी चुचियो को घूरते )अचानक प्रज्ञा ने आंखों से इशारा किया अपनी चुत का मैंने हा मैं सिर हिला दिया. BF XXX दुकान छोटी है इसलिए उसकी पास की गली मैं अंदर एक बड़ा गोदाम था मैं वहाँ का काम देखता था खूब माल भरा था वहाँ दुकान से नोकर ग्राहकों को वाह छोड़ जाते थे. फिर शुरू हुआ गप्पा गप्प प्रज्ञा का गदराया मांसल बदन मैंने चुम चुम कर गरम कर दिया था.उसके पहले हनी भी प्रज्ञा की चुचियो की मालिश कर रहा था पास मैं रेणु का गोरा चिकना कुंवारा बदन हनी के नीचे दबा था. उसको खूब मजा आ रहा था तगड़ा लौड़ा ले रही थी वो मेरी पीठ पर हाथ से दबाव बना कर मुजे जोर से धक्का लगाने का इशारा कर रही थी. इधर हनी ने रेणु को भी पूरा नंगा कर दिया था मैं प्रज्ञा की बड़ी बड़ी सांवली चुचियो को कड़क निपलो का मजा लेने लगा एक गड्ढे पर दोनो की चुदाई हो रही थी.मेरे लंड का साइज बहुत बड़ा था प्रज्ञा भाभी हाथ मे लेकर उसको kiss करने लगी वो और फूल गया.















