ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.पापा कितना जोर लगा सकते थें वो लगा कर जम कर चूत को फाड़ रहें थें, साथ ही उनका एक हांथ उसकी गोरी चूची को बेदर्दी से मसल रहा था, और दूसरा उसके कमर पर था। मेरा पूरा जिस्म थरथरा रहा था, पर आपस में जुड़ गए थें और सांसे ऊपर नीचे भाग रहीं थीं उन लोगो को देख कर क्योंकि मैंने आज पहली बार चुदाई देखा था।ऊपर से वो मेरे ही पापा थें, उनको चोदने का तकनीक अच्छे से मालूम था तभी तो उस लड़की की दोनों टांगे मेरे पापा में कमर पर कसी हुई थीं। मैं अजीब सा महसूस कर रहीं थीं, माथे पर पसीने की नन्ही बूंदे मेरे गालों पर अब तबके लगे थे, मैं जाने अंजाने में गर्म हो चुकी थीं, और मेरे चूची भी उस दौरान खड़ी हो गई.जो मैंने उस वक्त खुद को देखा, और मेरी पैंटी भी ऐसे गीली हो गई जैसे किसी ने पानी गिरा दिया हो, अब मैं वहां ज्यादा देर नहीं रुक सकी, मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था, मेरे लिए वो एहसास नया था, मैं घर चली आई और सीधे कमरे में घुस गई, मम्मी ने आवाज भी लगाया पर मेरा जिस्म अजीब हरकत कर रहा था.और मैं अनसुना किया आ पहुंची कमरे में, दरवाजा धड़ाम से बंद किया और










