बस तुम मुझे थोड़ी और इबादत करने का मौका दे दो.”“कल की बात अलग थी,” मुमताज ने जवाब दिया. ऐसा न हो कि मैं जो सोच रहा हूं वो हो ही नहीं और मुझे खाली हाथ लौटना पड़े. XXXBF मैं भी उसकी जीभ का रसपान करते हुए उसकी चून्ची को मसलने लगा।मेरा हाथ मुमताज के मम्मे को छोड़ कर उसके मांसल चूतड़ पर पहुँच गया. “लेकिन मैं घर पहुँचते ही उसे मिटा दूंगा. न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.”मैं बेइंतिहा खौफ और बेबसी के आलम में था. “सच तो यह है कि तुम्हारे जैसी खूबसूरत और जहीन औरत मैंने आज तक नहीं देखी. उसने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश भी नहीं की. मुमताज अब बुरी तरह मचलने और फुदकने लगी थी. इस बार उसका हाथ भी निष्क्रिय नहीं था. मैं तो सिर्फ तुम से मिलने के लिए आया हूं क्योंकि कल तुम्हारे साथ ज्यादा बात नहीं हो सकी थी.”मुमताज ने कहा, “इसमें तकलीफ की क्या बात है! जब ऊँगली और जीभ का दोहरा हमला हुआ तो मुमताज बेसाख्ता बोल उठी, “बस वकार साहब, अब आ जाइए!”अब मुमताज को और मुन्तजिर रखना बे-अदबी होती. मुझे अपने लंड पर एक लज्ज़त भरा दबाव महसूस होने लगा. उसके मांसल और सुडौल चूतड़ मेरी आंखों के सामने नुमाया हो गये. तो यह उनका जाल था?















