होली तो वैसे भी मस्ती का त्यौहार है और जीजा और सहलज के बीच तो काफी खुल कर होली होती है. चूंकि उन्होने मेरी चूत चाट कर मेरी प्यास बुझा चुके थे इसलिए मैं भी उनकी इच्छा पूरी करने को विवश थी. BFSex मैं दोनों हांथों से जीजा के पूरे बदन पर चिकोटियां काट रही थी. वो स्वभाव से भी काफी मजाकिया हैं. इस समय तक मेरी उत्तेजना हिमालय की ऊंचाई पर पहुंच चुकी थी. जिसकी मदद से उन्होने मेरी चूत को बुरी तरह मथ डाला था और मुझे सुख की असीम ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया था.“खुल कर बताओ तुम्हे मज़ा आया या नहीं” जीजा जी मुझसे चिपकते हुवे बोले.लेकिन मैं इस बात का क्या जवाब देती. इस समय तक मेरी उत्तेजना हिमालय की ऊंचाई पर पहुंच चुकी थी. उनकी ये हरकतें मुझे बहुत अच्छी लगती लेकिन बुरा मानने का नाटक करती.उनको मन से मना करने का तो सवाल ही नहीं उठता था. लेकिन शर्म से मेरी आँखें अपने आप मूंद गई. शादी को १० साल हो गए हैं. सुहागरात वाले दिन जब मैने जब उनका लंड पहली बार देखा तो मुझे काफी निराशा हुई थी. उनकी जीभ लूप लूप करती हुई कई बार मेरी चूत के ऊपर घूम चूकी थी और उसकी लार से मेरी पूरी चूत गीली हो गई थी.और मुझे लंड की जबरदस्त तलब महसूस हो रही थी.















