ऐसे तो मैंने जन्नत को कभी नहीं देखा था। आखिरकार मैंने बौखलाए हुए स्वर में जन्नत से पूछा कि: जन्नत क्या हुआ है तुम्हें ?पर जन्नत तो ऐसे रोए जा रही थी जैसे उसने आज चुप न होने की कसम खा रखी हो। मेरे दिल से अब जन्नत का रोना बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मेरे अंदर की विवशता अब बढ़ती ही जा रही थी कि इतने में जन्नत ने मेरी पहले से ही बेचैन आत्मा पे एक और परमाणु बम दे मारा।जन्नत ने मुझे कहा आई लव यू रिजवान।मुझे ऐसे लग रहा था कि जैसे एक साथ किसी ने हजारों सुई मेरे शरीर में घुसेड़ दी हों। अगर जन्नत की रोती हुई आवाज मुझे फिर से न झकझोरती तो जाने कब तक मैं आश्चर्य में ही डूबा रहता। जन्नत ने रोते रोते कहा कि रिजवान बोलो न कुछ जवाब क्यों नहीं दे रहे मेरी इस बात का. BFSex वो लड़ाई जारी थी। मुझे आज बहुत बोझ लग रहा था अपने पे। मुझे ऐसे लग रहा था कि आज मैं पागल हो जाऊँगा। इतनी कम उम्र में मेरी किस्मत मेरे साथ यह कैसे कैसे खेल रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.शायद मुझमे इस बोझ को उठाने का बल नहीं था, पर जो भी हो, किस्मत में यह भार अब मुझे उठाना ही था। मैंने रूम की















