खाने के बाद माँ सफाई करने लगी. BFSex दूसरे दिन सुबह फिर आंटी नहाने चली गयी. अब दोनो नंगे हो चुके थे. उसमे कुछ कपड़े. और पापा भी उठ कर मंदिर चले गये.माँ दीदी से -बेटी चाय डाल दे मैं देके आती हूँ तेरे ससुर को.फिर माँ चाय लेकर उनके के कमरे मे गयी. अंकल माँ की पेंटी नीचे कर रहे थे. माँ उन्हे देख शरमाई फिर कप रख अंकल को उठाने लगी. अंकल अपने हाथ माँ की छोड़ी कमर और पेट पे फेर रहे थे.अंकल —आहह समधन जी सच मे अंदर बहुत आग है.माँ – हां समधी जी इस आग को आप बुझा दीजिए.अंकल- आपकी आग बुझाने के लिए मैं कब से बेताब हूँ.अंकल– अब यहाँ तो कोई नहीं है आप मुझे अब भी समधी कहेंगे.माँ मुस्कुराते हुए– तो फिर क्या कहु.अंकल– वही जो आप अपने पति को कहती है.माँ शरमाँती हुए —आप भी ना!फिर दोनो एक दूसरे को चूमने चाटने लगे. बाहर कोई नहीं दिखा. रात को सब खाना खाने के बाद सब सोने चले गये पापा अंकल एक कमरे मे और माँ, आंटी, दीदी एक कमरे मे , और मैं और जीजू एक कमरे मे.















