वो बोला- बहुत मज़ा आया। कुछ देर हम दोनों एक दूसरे को बांहों में भर के लेटे रहे। फिर वो उठा और कपड़े पहन कर चला गया। मैं भी बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर अपने काम काज में बिज़ी हो गई। वो करीब 15 दिन और हमारे घर रहा और करीब करीब मैंने 10 बार और उससे चुदवाया।बेशक मुझे उसका लंड छोटा सा लगता था, मगर लौंडे में दम बहुत था। तब मुझे एहसास हुआ कि लंबे लंड की बात नहीं है, मर्द में दम होना चाहिए, औरत को तो वो छोटे लंड से भी तृप्त कर सकता है। बाकी भूख तो कभी भी शांत नहीं होती, 9 इंच का लंड खा कर भी मैं और बड़ा लंड चाहती हूँ। पर अगर मेरी तसल्ली 5 इंच का लंड भी करवा सकता है, तो फिर तो लंड चाहे 2 फीट का भी हो, तो भी मुझे तृप्त नहीं कर सकता। छुट्टियाँ खत्म होने पर वो अपने गाँव वापिस चला गया और मैं फिर से किसी और नए लंड की तलाश करने लगी।अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- एक दिन मैंने देखा कि वो मुझे घूरता रहता है, मेरे छोटे कपड़ों में से दिख रहे मेरे नंगे बदन को ताड़ता रहता है.मुझे भी मजा लेने की सूझी और मैंने अपना खेल शुरू कर दिया.















