जीजू कितने अच्छे हैं, मुझे कितना सुख दे रहे हैं…यह सोचते हुये मैं चुद रही थी कि जीजू ने जोर हुंकार भरी और अपना लण्ड मेरी गाण्ड से बाहर निकाल लिया। मैंने सीधे होकर उनका लण्ड अपने हाथ में ले लिया और जोर जोर से मुठ्ठ मारने लगी। तभी उसके लण्ड के सुपाड़े के बीच में से जोर की धार निकल पड़ी। मैं उस धार को ध्यान से देखती रही…कैसा रुक रुक कर वो दूध छोड़ रहा था। मेरी छातियों पर, पेट पर और कुछ बूंदें मेरे मुख पर भी बरस रही थी।‘अरे रे…छिः छिः ये क्या कर दिया…मुझे तो गीली कर दिया।’‘तनिषा रानी…जरा चख कर तो देखो !’‘क्या…?’ये देखो…! XXX Hindi चलो हटो, गुण्डे कहीं के !’जीजू मेरे ऊपर से धीरे से हट गये और बिस्तर पर ही बैठ गये। जीजू का कड़क लण्ड पजामें में से तम्बू की तरह खड़ा हुआ था। मुझे बहुत खराब लगा, सारी मस्ती चूर चूर हो गई थी। उनके खड़े हुये लण्ड से चुदने को पूरी तैयार थी। उनके इस तरह से हट जाने से मैं परेशान सी हो गई। पर मुझे क्या पता था कि आगे के कार्यक्रम क्या है। मैंने अपनी शमीज ठीक की पर वो छोटी बहुत थी।‘जीजू, मुझे वो अपना…दिखाओ ना !’ मैंने तिरछी निगाह से जीजू के लण्ड की ओर देखा।‘क्या लण्ड देखोगी?’ जीजू ने मुझे फिर भड़काया, दिल तेजी से धाड़










