हमारे घर मे एक पुराना मोटर-साइकिल भी था जिससे राघव घर के छोटे-मोटे काम कर देता था. XXX Hindi बातें बनाते हुए राघव भी पिछली सीट पर आ गया और मेरे से सट कर बैठ गया, फिर बोला – उस दिन बाइक से तेरे घुटनो मे चोट लगी थी ना, अब जख्म कैसा है?कहते ही स्कर्ट सरकाकर वो मेरा जख्म देखने लगा, जख्म अंदर की ओर घुटनो से उपर तक करीब 3-4 इंच था. डरते-2 मैने बैंगन को फिर से बुर के अंदर डाला.पहले एक इंच, फिर 3 इंच तक और फिर एक झटके मे लगभग 6 इंच तक, थोड़ा दर्द तो हुआ लेकिन बुर के अंदर कही कुछ मस्ती-सी भी आई, मैं बैंगन का पूछ पकड़ कर उसे घूमाने लगी, चुत मे आनंद की एक लहर दौड़ गयी, जब आधा बैंगन बाहर निकली तो देखी की उस पर खून लगा है जो तेल से मिक्स होकर हरे-हरे बैंगन पर लाल-लाल मोतियो की तरह चमक रहा था.चुदाई का नशा चढ़ने लगा था और मैं बैंगन को अंदर-बाहर करने लगी. सिर्फ़ झड़ने वक्त मेरी आँखे एक पल को बंद हो जाती थी जिसे कोई गौर नही कर पाता था. थोड़ा फॅमिली बॅकग्राउंड बताना ज़रूरी होगा. राघव कार लेकर उसी मैदान मे आया, मैं ड्राइविंग सीट पर बैठी और राघव बगल वाली सीट पर.वो मेरी तरफ झुक कर कार स्टार्ट किया और क्लच-गियर के बारे मे















