वो बोला- हाँ अंकल डाल दो। मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया तो मेरे लंड का टोपा तो उसकी गांड में आराम से घुस गया और उसको कोई तकलीफ भी नहीं हुई।जब टोपा घुस गया तो मैंने थोड़ा और थूक और ज़ोर लगा लगा कर अपना आधे से ज़्यादा लंड उसकी गांड में डाल दिया। मगर उस हरामजादे ने दर्द के मारे एक बार भी सी नहीं की बल्कि खुद अपनी गांड उठा उठा कर मुझे और लंड डालने को उकसा रहा था। मैंने उसके बाद थूक लगाना बंद कर दिया, मैंने सोचा, बड़ा साला गाँडू बना फिरता है, इसे थोड़ा दर्द भी दिया जाए।मगर मेरी शुष्क चुदाई में भी वो मज़े ले रहा था। करते करते मैंने अपना सारा लंड उसकी गाँड में उतार दिया। अभी तक जितनी औरतों की मैंने गांड मारी थी, सबमें करीब आधा लंड ही डालता था, क्योंकि उनको तकलीफ होती थी, और मैं बस उतना डाल कर ही चुदाई कर लेता था, मगर ये तो साला मज़े ले रहा था, तो मैं और डालता गया, और देखो, साला सारा लंड खा गया।7 इंच का लंड और मेरी झांट उसकी गांड को लग रही थी। मुझे अपने लंड पे ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे आगे उसकी गांड और टाइट हो गई हो, मगर अंदर से उसकी गांड पूरी गीली थी, बाहर छेद पर ही खुश्की थी, वहाँ















