ये सोचते सोचते मैं जाने कब सो गयी. मेरी इस कहानी की नायिका आँचल है. XXXBF मेरे बदन के रोगंटे खड़े होने लगे थे. गाण्ड में घुसा दे! हाय… आँचल… हाय… मैं गई… मेरा निकला… आँचल… आऽऽऽऽ ईऽऽऽई… मैं गई… मर गई… मेरी मांऽऽऽ… हाय रे…। रे… ये… ये… गई…” कहते हुए मैंने आँचल का हाथ पकड़ लिया… और मेरा पानी छूट गया… और पूरी झड़ गई…पर अभी बस कहां… आँचल मुझे छोड़ कर बिस्तर पर उल्टी लेट गई..“पलक अब तू चालू हो जा…”वो घोड़ी बन गई… मैंने डिल्डो उसकी गाण्ड के छेद पर रखा… और थोड़ा सा जोर लगाया… वो तो सरसराता हुआ अन्दर ऐसे गया जैसे कि पहले से ही रास्ता जानता हो… वो आहें भरने लगी… मैं जिस तरह पहले चुदी थी… उसी अन्दाज़ में उसे भी चोदती रही… फ़िर उसकी चूत में डिल्डो डाल कर उसकी मस्ती बढाने लगी… वो डिल्डो से चुदा कर शान्त हो गई। उसका मन अब भर गया था… वो सन्तुष्ट हो गई थी… पर मैं… मुझे बहुत अच्छा लगा था… मैंने आँचल को प्यार किया… और कोशिश करने लगी कि मुझे नींद आ जाए…अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- हमने घर आकर अपने रात को सोने के कपड़े पहने. वहां हम सभी ने यानि आँचल, उसके पति विजय और मैंने सुबह का नाश्ता किया.















