देसी माल ने हाथ लगाया तो जात-पात भूल गई

वह भी तेज़ी से चाट रही थी.10 मिनट बाद मे हांफता सा बोला, “हाहह बस… बस कर गरिमा अब निकाल दे अपने मुँह से बाहर अब झडने वाला है. लो चाटो.”उसने अपनी कमर उचकाई तो मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराया. BFSex कुछ देर बाद मौसी आई और मुस्कराकर बोली, “क्यों बेटा खूब मज़ा लिया रात भर नये माल का?”“मौसी आप भी.”“मैंने उसे तुम्हारे रूम मे जाते और वापस आते देखा था.”“जी मौसी पर चोदा नही है.”“क्या क्या किया?”“अभी मम्मों को चूस कर चूत को चाटा और उंगली से चोदा है.”“अपना माल दिखाया या नही?”“दिखाया अरे मौसी अपना उसके मुँह मे दे दिया है.”“अरे तुम दोनो तो एक दिन मे ही बहुत आगे तक जा चुके हो.”“हां मौसी अब आप उसे चुद्वा दीजिए. मौसी के होंठो पे मुस्कान थी. अब मेरे और गरिमा की ज़ुबाने एक दूसरे से खेलने लगीं. मम्मों से ज़्यादा मज़ा चूत मे है.”“हां गरिमा इसीलिए तो कह रहा था, मुझे भी बहुत मज़ा आया, देखो मेरा लंड कैसा कड़क हो रहा है, हाये अब इसका पानी भी निकालना पड़ेगा वरना यह मुझे सारी रात सोने नही देगा.”वह यह सुन मुझे देखने लगी. कुछ देर मे गरिमा का दर्द कम हुआ और वह कुछ संभल गई.उस ने एक ज़ोर की साँस ली और बोली, “आअहह मम्मी मुझे तो भैया ने मार ही डाला था.”“बेटी अब दर्द कम हुआ ना?”“हां अब

देसी माल ने हाथ लगाया तो जात-पात भूल गई

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