देसी भाभी की चुदाई जब वो किचन में खाना बना रही थी, भूखी जवानी का मजा लूटते हुए।

साहिल तो सो चुके थे।’नींद में भी वो कितने मासूम और प्यारे लग रहे थे, मैं उनकी नींद खराब नहीं करना चाहती थी इसीलिये वापस उनकी तरफ पीठ की और उनसे चिपक कर सो गई। सुबह मेरी आँख 6 बजे खुली तो मैंने देखा मेरे मासूम से पतिदेव अभी तक गहरी नींद में थे।मैं एक अच्छी बहू की तरह उठते ही अपने बैडरूम से सटे बाथरूम में गई और तुरन्त नहा धोकर तैयार होकर बाहर सास-ससुर के पास पहुँची। मेरी ससुर टीवी में मार्निंग न्यूज देख रहे थे और सासू माँ ससुर जी के लिये चाय बना रही थी। घर की नौ‍करानी भी काम पर लग चुकी थी।मैंने सास से कहा- मम्मी जी, अगर आपको एतराज ना हो तो मैं आप दोनों को चाय बना दूँ?उन्होंने उसके लिये भी तुरन्त मेरे ससुर को शगुन निकालने को कहा। मैं पहले ही दिन घर में घुलने मिलने की कोशिश कर रही थी। सास-ससुर को चाय पिलाकर और अपना शगुन लेकर मैं अपने कमरे में साहिल के पास पहुँची तो वो भी जाग चुके थे पर बिस्तर में पड़े थे।मेरे पास जाते ही उन्होंने मुझे खींचकर अपनी छाती से चिपका लिया और एक मीठा सा चुम्बन दिया। मैं तो शर्म से धरती में गड़ी जा रही थी पर उनकी छाती से चिपकना न जाने क्यों बहुत ही अच्छा लग रहा था। तभी बाहर से ससुर

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