दरवाजे से एक सुंदर सा रास्ता जो घर के बरामदे तक था और एक बड़ा सा गार्डन जिसमे कुर्सिया लगी थी और बरामदे में एक बड़ा सा झूला भी लगा हुआ था और वो घर एकदम फ़िल्मो जैसा सुंदर आकर्षक था।फिर मैंने देखा कि दरवाजे पर मेरे चाचा हमारा बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, मेरी चाचा जी थोड़ी छोटे कद की वो करीब पाँच फुट सात इंच की थोड़ी मोटी और एकदम गोरी चिट्टी बड़ी सुंदर नाकनक्श की थी। फिर मेरे चाचा उस समय कार्गो पेंट और आधी बांह की शर्ट पहने हुई थी.और शर्ट के अंदर उन्होंने सफेद टी-शर्ट उन्होंने थोड़ा मोटा होने की वजह से अपनी उस शर्ट को अंदर भी नहीं किया था और आगे से कुछ बटन भी नहीं लगाए थे और अब वो अपनी बाहों को फैलाए हमारी तरफ बड़े और मुझे अपनी बाहों में लेकर वो मुस्कुराते हुए मुझसे बोले कि तू कितनी बड़ी हो गयी है.और वो मेरे पापा की तरफ देखकर उनसे बोले कि जब मैंने पिछली बार इसको देखा था तब तो यह एकदम छोटी बच्ची जैसी थी। फिर मेरे पापा बीच में ही उनकी बात को काटकर बोले कि इतने साल तक तुम हमें किसी को मिलने नहीं आओगे तो ऐसा ही होगा और बच्चे छोटे से बड़े भी तो होंगे ना, क्या यह हमेशा ऐसे ही रहेगे?अब चाचा जी















