देसी गांड और चूत की चिकनाहट

काफी बड़े घर का था और चूतों का शौकीन था, उससे मिलने के लिए ही मैंने एक महीने के अंदर अंदर चंडीगढ़ में सेक्टर 14 में पंजाब यूनिवर्सिटी में एम ए डिस्टेंट में एडमिशन ले ली।छुप छुप कर ढिल्लों से फोन पर बातें करती रहती और उसको अपने पुराने किस्से भी सुनाये। मेरी बातों से उसे पता चल चुका था कि इसकी सर्विस बहुत ज़ोरदार होनी चाहिए। मैंने भी जल्दी नहीं कि क्योंकि मैं उसे इतना तड़पाना चाहती थी कि जब भी मिले तो मेरे जिस्म और चूत की चूलें हिला के रख दे… क्योंकि अब मुझे मेरे पति से भी तगड़ा मर्द चाहिये था।इसी कारण इस बार मैंने बदमाश और हैवी लड़के को चुना था। पेपर आये तो मैंने यूनिवर्सिटी में एक सहेली बना ली, प्रीति नाम था उसका… और अपने पति से कहा- रात को मैं उसके साथ ही रहा करूँगी। मेरा पति कमीना था इसलिए वो हर पेपर से एक दिन पहले मुझे उस लड़की के यहाँ छोड़ देता था और अगले दिन घर ले जाता था। तो मेरे पास एक रात ही बचती थी। इसलिए ढिल्लों को मैंने यह बात बता दी कि तेरे पास एक ही रात है फिलहाल।“कोई बात नहीं!” कहकर वो मान गया और जनवरी की एक रात मुक्करर हो गयी।ढिल्लों मुझसे बोलता था कि पटाका बन के आना जब भी आना। लेकिन मैं ज़्यादा

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