हकीकत में मैं चाची का बड़ा सम्मान करता था, उनकी बड़ी इज्जत करता था. XXX BF आज सालों बाद चाची से रंगीन साड़ी पहनी थी. उनके आने से हमारा घर महक गया. जबकि बाकी चाचियाँ कुछ कहती तो मैं बहाना बना देता.दिल में सपना भी था कास कभी चाची चुम्मा चुम्मी दे देती, काश कभी चाची के नए नए बूब्स पीने तो मिल जाता तो मेरी तो जिंदगी बदल जाती. मेरी नई चाची का नाम करिश्मा कुमारी था.पर चाचा ने जब सुहागरात की रात को नई वाली चाची की सील तोड़ दी तो उनका नाम करिश्मा कुमारी से करिश्मा सिंह हो गया. और फिर से उनको कुतिया बना के पीछे से उनकी चूत मरने लगा. वरना तो वो डीप्रेशन में चली गयी थी. वो समझ गयी की उनका भतीजा उनको बहुत प्यार करता है. आई लव यू ! चाची भी आज फूल चुदने के मूड में थी.अब मैं उनके महकते जिस्म पर उपर से नीचे आने लगा. चाची की पीठ में मैंने झटके से हाथ डाल दिया और अपनी ओर खींचा.चाची कांपने लगी. उन्होंने कुछ नही कहा. उसको चोदुंगा. लगे हाथों मैंने अपनी पैंट भी निकाल दी. चाची की बुर साफ थी, जानते बनी थी.चाची पैर खोलो !! नई चाची के रूप को देखकर चाचा के होश उड़ गए.















