फिर भी उसने कोशिश की, “हां, लेकिन मेरा मकसद …”मैंने उसकी बात काटते हुए कहा, “तुम्हारा और मेरा मकसद एक ही है. मैंने एग्रीमेंट उसे दे दिया. BFSex ओsssह! बस तुम मुझे थोड़ी और इबादत करने का मौका दे दो.”“कल की बात अलग थी,” मुमताज ने जवाब दिया. मैं फ़ोन पर बात कर रही थी कि दरवाजे की घंटी बज गई. मुमताज को एक बार चोदने की कीमत दस लाख रुपये? ऐसा न हो कि मैं जो सोच रहा हूं वो हो ही नहीं और मुझे खाली हाथ लौटना पड़े. अब थोड़ी हिम्मत और करो. उसकी जाँघों का मनमोहक संधि-स्थल मेरे मुंह को निमंत्रण देता प्रतीत हो रहा था मानो कह रहा हो कि आओ, मेरा भी स्वाद चखो. मैंने कहा, “मैं क्या समझता हूं यह मैं बोल कर नहीं बल्कि कर के दिखाऊंगा.”मैंने मुमताज का एक हाथ अपने हाथ में लिया और उसे उठा कर अपने होंठ उस पर रख दिये. मैं उसके एक मम्मे को चूसने लगा और दूसरे को अपने हाथ से मसलने लगा. मेरे बार-बार पूछने पर उसने बड़ी मुश्किल से मुझे बताया, “वकार, मैं बड़ी मुश्किल में पड़ गया हूं. मेरी धडकनों की आवाज तो मुमताज के कानों तक पहुँच रही होगी.















