गर्म रात में देसी जोड़ों का जोशीला अंतरंग सुहागरात

अब उसके हाथ पैर मेरे हाथों में थे. ऐसा रोमांस संध्या ने कभी नहीं किया था. XXXBF फिर हम दोनों सो गये. लेकिन संध्या ये दर्द सहने को तैयार थी.मैंने संध्या से पूछा- ज्यादा दर्द हुआ तो?उसने कहा- मैं सहन कर लूंगी. लेकिन ज्यादा लम्बा और मोटा होने के कारण लंड अंदर जा नहीं रहा था. मैंने भी बाय कर दिया. मुझे यहाँ काम करते हुए 2 साल हो चुके थे लेकिन उसका अभी यह नया जॉब था. अब उसका सफेद गोरा बदन मेरे सामने था. लाल ब्रा लाल पेंटी… जो मेरा पसन्दीदा रंग है. ऐसा रोमांस संध्या ने कभी नहीं किया था. मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह चूत चोदने मिलेगी इतनी जल्दी!अब मैंने उसकी ब्रा के हुक को खोलकर उसके गोल गोल गेंदों जैसे बूब्स को आजाद किया और हाथों से मसलना चालू किया. कोई देख लेगा तो?मैं बोला- अपने दुखों में ही जीना चाहती हो क्या?फिर मैं उसके पीछे आया और उसके दूधों को हाथों से पकड़ लिया. उस दिन मेरा मन विचलित हो चुका था. उसने कहा कि शिवम कह रहा था अभी कॉल पर कि कल वापिस आ जाऊंगा नाईट तक!तभी मैंने वाइन खोल कर संध्या को पास बुलाया.

गर्म रात में देसी जोड़ों का जोशीला अंतरंग सुहागरात

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