मैं तो बस…”मुझे उसकी बात सुनकर बरबस उस पर प्यार आ गया, और मैंने उसके होठों को चूम लिया।”अरे, नहीं बेटा, तुम्हारी खुशी के लिये तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ। तुम मेरा और सन्नो का कितना ख्याल रखते हो, और ये तो तुम्हारे जवान जिस्म की जरूरत है, बाहर जाकर किसी रन्डी के ऊपर रुपये उड़ाने से तो अच्छा ही है कि तुम अपने जिस्म की जरूरत मेरे साथ ही पूरी कर लो, किसी बीमारी होने का खतरा भी नहीं रहेगा। आज के बाद जब भी तुम्हारा मन मेरी चूत को चाटने का करे, तो चाट लिया करना, और मैं तुम्हारे लण्ड को चूस कर उसका पानी निकाल दिया करुँगी, ठीक है?”अमर मेरी बात सुनकर खुश हो गया, और मुस्कुराते हुए बोला, ”हाँ मम्मी ये ठीक रहेगा।””मेरा प्यारा बेटा, हाँ एक बात और, तुम चूत बहुत अच्छा चूसते और चाटते हो, आज मैं बहुत दिनों के बाद इतना अच्छा वाला झड़ी हूँ।””थैन्क्स मम्मी, आप मेरा कितना ख्याल रखती हो,” अमर शरारती अन्दाज में बोला, ”लगता है आपके जिस्म को भी इसकी जरूरत थी।”ये सुनकर मैं हँस पड़ी और मजाक में अमर की छाती पर एक प्यार भरी चपत लगा दी। ”चल अब सो जा, सुबह फ़िर फ़ैक्ट्री भी काम पर जाना है। सोने से पहले रोजाना रात को इसी तरह मैं तेरी सारी थकान मिटा दिया करूँगी।”जब मैं बैड से















