इसलिए मैंने धीमे से कहा- ये मैंने जान बुझ कर नहीं किया है. मुझे दीदी की मंशा गड़बड़ लगने लगी. XXX BF खुद ब खुद हो गया है.लेकिन दीदी मेरे लंड को दबाते हुए मुस्कुराते हुए कही- बच्चा बड़ा हो गया है. तुम मेरे यहाँ आए हो तो तुम्हे कोई कष्ट थोड़े ही होने दूँगी।कह कर वो चली गई। थोडी ही देर में वो दो कप कॉफ़ी बना लायी। रात के डेढ़ बाज़ रहे थे। हम दोनों कॉफ़ी पीने लगे। कॉफ़ी पीते पीते वो बोली – ला, में तेरा बदन दबा देती हूँ। इस से तुम्हे आराम मिलेगा।मैंने कहा – नही दीदी, इसकी कोई जरूरत नही है। सुबह तक ठीक हो जाएगा।लेकिन दीदी मेरे बिस्तर पर चढ़ गई और बोली – तू आराम से लेटा रह मै अभी तेरी बदन की मालिश कर देती हूँ.कहते कहते वो मेरे जाँघों को अपनी जाँघों पे रख कर उसे अपने हाथों से दबाने लगी। मैंने पैजामा पहन रखा था। वो अपनी नंगी जाँघों पर मेरे पैर को रख कर उसे दबाने लगी। दबाते हुए बोली – एक काम कर, पैजामा खोल दे, सारे पैर में अच्छी तरह से तेल मालिश कर दूँगी।अब मैं किसी बात का इनकार करने का विचार त्याग दिया। मैंने झट अपना पैजामा खोल दिया। अब मैं अंडरवियर और बनियान में था। दीदी ने फिर से मेरे पैर को अपनी नंगी जांघों पे रख















