मैं साँस लेने के लिए च्चटपटा रही थी. XXXBF ” चादर के अंदर से पाकड़ो.” वो इस तरह से मुझे सलाह दे रहा था मानो डॉक्टर मैं नही वो हो.मैने काँपते हाथों से उसके चादर को एक तरफ से थोडा उठाया और दूसरे हाथ को अंदर डाल दिया. अब मैं आपको हम दोनो के बीच किस तरह प्रेम का पौधा उगा उसकी कहानी सुनाती हूँ.हुआ यूँ की एक दिन मैं राउंड पर निकली थी. कभी कभी किसी के कराहने की आवाज़ ही सिर्फ़ महॉल को बदल दे रही थी. मेरे हाथ को सख्ती से थामे हुए अपने टाँगों के जोड़ तक ले गया.मेरा हाथ उसके तने हुए लंड से टकराया. इस बीच एक बार उसकी कमर के उपर से चादर खिसक गयी और उसका तना हुआ लंड मेरे सामने आ गया. मैने उसके बदन को सहारा देकर सिरहाने पर कुछ उठाया. एक पतली चादर को सीने तक ओढ़ रखा था. वो काफ़ी दिनो से हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ा हुआ है. मैने अपना हाथ नीचे लाकर कुछ छुआ तो चौंक उठी. मैने अपना हाथ नीचे लाकर कुछ छुआ तो चौंक उठी. उसके दरवाजे को खटखटाते ही मैं कमरे से बाहर निकल गयी. Unchudi Chutशुरू से ही मुझपे मरने वालों की कोई कमी नहीं रही थी. Unchudi Chutशुरू से ही मुझपे मरने वालों की कोई कमी नहीं रही थी.















