यही मेरठ में मेरा एक दोस्त बना था जो कि मेरे साथ ही आने वाला था जो मेरे शहर अलवर के पास का ही रहने वाला था रात ज्यादा होने के कारण और बाहर का मौसम खराब होने के कारण मैंने उसे अपने घर में रुकने के लिए मजबूरन मुझे कहना पड़ा.और उसके पास कोई और विकल्प न होने के कारण उसने भी हां कर दी, शाम 6:00 बजे अपने घर पहुंचा और मैं जाते रचना को गले लगा लिया. XXXBF मेरे लिए यह सब बातें अब आम हो गई थी.हम लोग मांसाहारी थे पर ड्रिंक सिर्फ मेरे पति करते थे. तड़पाओ मत! जब वह मेरे साथ एक पैक शराब पी लेती है फिर उसे कुछ होश नहीं रहता और वह से वही करती है जो मैं चाहता हूं.लेकिन मैंने भी लंड अंदर न डाल उसकी चूत के बाहर ही रगड़ना चालू कर दिया. अब हम दोनों अंडवियर में थे. उसका खुल कर बोलना ही सेक्स के मजे को दुगना कर देता है. मैं तब तक नहीं डालूंगा.रचना कुछ नहीं बोली, चुपचाप तड़पती रही और मेरी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींचने की कोशिश करती रही. आखिर 2 महीने का समाप्त हुआ और मैं घर जा रहा था शाम की बस से और उसके बारे में ही सोच रहा था कि घर जाकर उसको सरप्राइज दूंगा.आज शराब पीने के बाद हम लोग















