पापा एकदम तेज़ी से मेरी कमर को पकड़ कर चोद रहे थे और ऊह्ह..ओह्ह..ऊह्ह्ह्ह…की आवाज़ लगा रहे थे, उनका हर धक्का मुझे लग रहा था.अब उन्हें लगने लगा का था की मैं एंजाय करने लगी हूँ तो उन्होंने स्पीड और बढ़ा दी और मुझे चोदने लगे. मैं भी इतना थक गयी की लेट गयी, तब मुझे ना गांड फटने का दर्द था, ना ही चूत का. XXXBF मेरा छोटा भाई है पर वो पढने के लिए दिल्ली गया है. मुझे मजबूर मत करो..’ पापा अब मुझे डराना चाहते थे. इस बार मेरी हालत ऐसी नहीं थी की मैं बैठ सकू पर मैं फिर भी बैठी और एकदम से मैंने पापा के लंड को पकड़ा और जोर जोर से अपने मुट्ठी में हिलाने लगी ता की उनका वीर्य निकल जाये और वो शांत हो जाये..फिर मैंने तुरंत उसे अपने मूंह में ले लिया और जम कर चूसने लगी और आखिरकार उनके लंड से जोरदार पिचकारी मेरे मूंह में निकली और मैं फिर भी लंड को हिलाती रही जब तक एक एक बूँद खाली ना हो जाये. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती वो मेरे पास आये अपने दोनों हाथ मेरे ब्लाउज पर रक्खे और एक ही झटके में मेरे ब्लाउज को फाड़ दिया.मैं तो पापा को देखती ही रह गयी, इससे पहले कि मैं और कुछ समझू उन्होंने मेरे बूब्स को अपने दोनों















