जिसकी वजह से भाभी की हालत अब बहुत खराब हो रही थी.और वो अब ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी, प्लीज अब उह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे और मत तड़पाओ ऊईईईईइ माँ आह्ह्ह्हह्ह में अब और नहीं सह सकती, प्लीज कुछ करो और वो विकाश से जल्दी अपने लंड को चूत में अंदर डालने को कह रही थी. BFSex मैंने उनसे कहा कि आप वापस घर पर चले जाइए, आपकी सभी दवाईयां में आपको लाकर दे दूंगा.मैंने उनसे दवाईयों वाली पर्ची ले ली और फिर मेरठ जाकर दवाईयां खरीदकर लाया और जब में 3:30 बजे के करीब दवाईयां देने विकाश के घर पर पहुंचा तो मैंने देखा कि दादा जी बाहर बरामदे में बिस्तर पर पड़े हुए आराम कर रहे थे. उसके ऐसा करने से चूत दोबारा फिर से सूख गई थी और अब विकाश ने भाभी को घोड़ी बनाया और उनके पीछे से लंड को उनकी चूत में डालने लगा.भाभी ने हल्की से चीख मारी और हंसने लगी और अब एक बार फिर से उनका चुदाई का काम शुरू हो गया थाज विकाश पूरे जोश से भाभी को धक्के देकर चोद रहा था.















