मम्मी जी को कौन सा आसन पसन्द था, वही बताइये”.उन्होंने मुझे पेट के बल लिटा कर घुटनों को मोड़ने का निर्देश दिया, घुटनों को मोडा तो मेरा पिछला हिस्सा उपर उठ गया, जबकि मेरा वक्ष और चेहरा तकिये से चिपका हुआ था, उन्होंने बताया “इसे धेनु आसन कहते हैं, इस आसन से गर्भ आसानी से ठहर जाता है, तुम्हे पसन्द ना हो तो चित्त लेट जाओ.”“नहीं यही आसन ठीक है, पता तो चले की इस आसन से कितना आनन्द आता है.”वे मेरे पीछे घुटनों के पास ही बैठे थे, मेरी स्वीकृती मिलते ही वे भी अपने घुटनों पर खड़े हो गये, तब उनका लिंग मेरे गुदाद्वार से आ टकराया, मैं डर गई, तभी उन्होंने हाँथ लगा कर लिंग मुण्ड को योनिद्वार पर पहुंचा दिया, फिर मेरे गुदाद्वार पर अंगुली रख कर पुछा, “इसके मैथुन का आनन्द कभी उठाया है?”मैंने कहा “बहुत दर्द होता है, एक बार इन्होनें प्रयास किया था, मेरी जान निकलने लगी तो छोड़ दिया.”“ज्यादा जोश के कारन बेरहमी कर बैठा होगा, वरना गुदा – मैथुन में भी बहुत आनन्द प्राप्त होता है, कभी मैं कर के दिखाऊंगा, पीड़ा हो तो बताना,” कह कर वे अपना लिंग योनिद्वार में प्रवेश कराने लगे.लिंग मुण्ड का प्रवेश तो सामान्य ही लगा, लेकिन मुण्ड प्रवेश के बाद दो पल को वे रुके फिर एक ऐसा तेज झटका दिया की संपूर्ण लिंग प्रवेश करके















