वो बोली.तो आज जी भरके चूस ले! मैंने कहा।वो कूद कर मेरी गोदी में चढ़ गई। खाने के बाद हमने बत्तियां बुझा दी। नौकरी पाने की खुशि थी। इसलिए दोगुनी खुशि थी। सबसे पहले मैंने उसकी बुर पी। फिर मैंने उसको कुतिया बना दिया। डोगी स्टाइल में मैं आ गया। दोनों टाँगों को सिकोड़ने से उसकी बुर एक्स्ट्रा टाइट हो गयी थी।पीछे से जब मैंने लण्ड लगाया तो लगा ही नहीं। मैंने रागिनी की टाँगों को हल्का सा खोला। लण्ड बुर में डाल दिया। फिर दोनों पैरों को सिकोड़ दिया। अब खूब कसावट मिलने लगी। मैं मजे से अपनी चचेरी बहन को चोदने लगा। पीछे से चोदने में ही दोंस्तों असली कसावट मिलती है। मैं मजे से लेने लगा। बिच में रागिनी के चुत्तरो को सहलाता था। गाण्ड में ऊँगली भी कर देता था।रागिनी को पेलते पेलते मैं बुर की सुंदरता में खो गए। बहुत सुंदर बुर थी दोंस्तों। मैंने देखा रागिनी चुदास के चरम सुख में डूब गयी है। मैंने जरा सा थूक ऊँगली में लिया और गाण्ड पर मल दिया। अब मैंने अपनी 2 लम्बी उँगलियाँ उसकी गाण्ड में डाल दी और फेटने लगा।रागिनी चिल्लाने लगी। अनिरुद्ध भैया! BF XXX चाचाजी बोले।मुझे 10 हजार की गद्दी खर्च के लिए दी। रागिनी और मैं अगली सुबह बस से साथ निकल पड़े। बस जब गोरखपुर पार कर गयी। अब चाचा का भूत पीछे छूट















