जीजा जी शाम को ३ बजे आ गए, मैंने उनके लिए खाना बनाया और दोनों मिलकर खाना खाए, फिर हसी मज़ाक का दौर चला.फिर वो कभी कभी मेरी गाल को छु देते मुझे बुरा नहीं लग रहा था क्यों की वो बड़े ही सुन्दर और गठीला बदन है उनका, आज मौका था किसी मर्द के साथ रहने का मैं भी सोच ली की चलो अभी तो मेरी शादी होने में टाइम है पर सेक्स का मज़ा लिया जाए.मैंने भी उनके सामने कुछ ऐसी हरकते की तब वो पूरी तरह से खुल गए और बात मेरी चुचिया दबाने तक की आ गयी, मैंने भी चूची दब्बाने का खूब मजा लिया पर मैं इससे कुछ ज्यादा चाहती थी क्यों की मेरा बूर पानी पानी हो गया था क्यों की पहली बार किसी ने मेरी चूची को हाथ लगाया था.मैंने बैचेन होने लगी और मैंने जीजा जी को पकड़ कर में डीप किश करने लगी उनके होठ की अपने होठ से दबाने लगी और जीभ को उनके मुह में घुसा दी, मेरी जीजा जी मुझे अपनी बाहो में जकड लिया और मुझे बेड पे पटक दिया, मैंने भी उनको अपनी बाहो में भर ली और सीने से दबा लिया.वो मेरी चुचिया उनके छाती से दब रहा था फिर वो मेरी टॉप को उतार दिया और ब्रा खोल दी जिसके मेरी गोरा गोरा और बड़ा बड़ा















