टोपी उतार कर लंड का मत्था धक दिया. XXX BF स..र..र..र.र की आवाज़ के कभी कभी घच्छ से लंड घुसेड देते थे. घच्छ से चूत में घुसेड दिया.मुझे बोलने का मौका ही ना दिया, घचा घच्छ, घचा घच्छ ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे. महेश का कम मुश्किल था लेकिन वो सब्र से काम लेते थे. महेश हलके, धीर्रे और गहरे धक्के से रेशमा को चोदने लगे. उन का आठ इंच लंबा गीला लंड देख रेशमा शरमाई. छोटे होठ पतले थे लेकिन सूजे हुए थे. ये तो अच्छा हुआ कि रेशमा की पहली चुदाई महेश ने की, वरना चाची की दहशत हक़ीकत में बदल जाती.यहाँ सतीश और में झाड़ चुके थे, सतीश का लंड नर्म होता चला था. उन के परिवार में एक लड़का था, सतीश, मेरी उमर का और एक लड़की थी, रेशमा जो दो साल छोटी थी. रेशमा की क्लाइटॉरिस अच्छि तरह रगड़ी गयी तब वो छटपटाने लगी.महेश बोले : रेशमा बिटिया, ये आखरी घड़ी है. रात का खाना खा कर हम ताश खेलने लगे. में रेशमा के पास गयी. तेरे भैया तुम्हे ज़रूर चोदेन्गेइतने में फिर से दरवाजा खटखटाने की आवाज़ आई. हम कुर्सी में थे इसी लिए आधा लंड ही चूत में जा सकता था. लेकिन चुदवा नही सकोगी..रेशमा : क्यूँ नहीं ?















