कुछ अनहोनी होने से पहले छूट जाने से मैं खुश थी. BF XXX होली बार बार थोड़े ही आएगी.”मैं अपनी साड़ी पर गिरा थोड़ा गुलाल झटकते हुए बोली “अच्छा अब तो नाश्ता कर लो.”विनय: “हर साल मैं तुम्हे पक्का कलर लगाता हूँ, इसके बिना होली पूरी कैसी होगी.”ये कहते हुए उसने जेब से एक पक्के कलर की छोटी डिबिया निकाल ली.मैं: “विनय, इसको अंदर रखो. “होली में सेक्सी भाभी”उसने मुझे सीधी करने के लिए मेरे पेटीकोट का नाड़ा पकड़ कर खिंचा जिससे वो नाड़ा खुल गया. मुझे अब वैसे भी होली खेलना इतना पसंद नहीं था जितना बचपन में था. वो सीमा भी तो हंस रही थी.”मैं: “तो तुम मुझसे सीमा का बदला ले रहे हो?”विनय: “कैसा बदला, वो सीमा तो सुबह से इंतजार कर रही हैं बासुकी कब आएगा होली खेलने. उसका कलर ज्यादा पक्का नहीं था तो उसकी रगड़ से मेरा कलर भी काफी निकल गया था.अब उसने मुझ पर पानी डालना और छूना बंद कर दिया और खड़ा हो गया. मैंने उसको बोला था इतना जल्दी मत नहा.” “होली में सेक्सी भाभी”मैं: “तुम फेंक रहे हो या सच बोल रहे हो?”विनय: “सच, मैंने आकर उसका टब में लेटे हुए फोटो भी लिया था.”मैं: “सीमा के साथ इतना हुआ और तुमने बासुकी को कुछ नहीं कहा!”विनय: “होली पर इतनी मस्ती तो चलती हैं.















