बिस्तर में मेरी देसी सौतेली माँ के साथ गर्म रात

जो आपको सही लगे करिये” मैंने कहा.उसके बाद मेरी शादी मेरे देवर कौशल से कर दी गयी। ये कार्यक्रम सादे समारोह में कर लिया गया। क्यूंकि मैं अब विधवा हो चुकी थी। इसलिए कोई जादा ख़ुशी का मौका नही था। पंडित ने मेरी और कौशल की शादी करवा दी। फिर अग्नि के 7 फेरे लेकर हम पति पत्नी बन गये।शादी के बाद हम दोनों अपने कमरे में सुहागरात मनाने आ गये थे। अब मेरा देवर कौशल ही मेरा नया पति था। मैंने लाल रंग की अच्छी सी साड़ी पहन रखी थी। मैं कमरे में आकर बेड पर एक तरफ बैठ गयी। मैं बार बार कौशल को तिरछी नजरो से देख रही थी। उसने कपड़े बदल लिए और कुर्ता पजामा पहन लिया।वो भी बिस्तर पर एक तरफ बैठ गया था। वो काफी संकोची स्वाभाव का था। मैं तिरछी नजरो से अब अपने नये पति कौशल को देख रही थी और सोच रही थी की कैसा किस्मत का खेल है। जिस देवर के साथ मैं हंसी मजाक करती थी और ठिठोली करती थी आज वो मेरा पति परमेशवर बन गया है।कौशल मुझे देखने लगा। उसने धीरे से मेरे हाथ को पकड़ लिया। मैं डर गयी और कापने लगी। मैं जान गयी थी की अब वो मुझे चोदेगा। “भाभी अगर आज आपका सुहागरात मनाने का मन नही है तो कोई बात नही। मैं कोई जोर

बिस्तर में मेरी देसी सौतेली माँ के साथ गर्म रात

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