तू इतनी बड़ी हो गयी। किसी ने चोदा नही तुझे???” मैंने पूछा.“धत्त्त!!!” वो मुंह बनाकर बोली और मुझे मारने लगी.मैं अपनी ऊँगली को जीभ में लगाकर गीला किया और चूत की दरार में ऊँगली नीचे से उपर चलाने लगा। अंशिका किसी मछली की तरह तड़पने लगी। मुझे सेक्स का नशा चढ़ गया। मैं जल्दी जल्दी उसकी चूत की घाटी में ऊँगली करने लगा। अंशिका मस्त हो गयी। उसके खूबसूरत पैर मैंने सहलाये और किस किया। फिर उसकी चुद्दी मैं चाटने लगा। अंशिका मजा लेने लगी।दोस्तों मैं जल्दी जल्दी उसकी बुर चाट रहा था। अपनी जीभ के किनारे से मैं उसकी रसीली चूत चाट रहा था। हल्की झांटे उसकी चूत पर थी। मैं उसके चूत के दाने में बार बार अपनी जीभ का किनारा टकरा रहा था। अंशिका तडप रही थी। उसकी बुर का स्वाद नमकीन था जो मुझे अच्छा अच्छा लग रहा था।मैं अंशिका की चूत चाटने में व्यस्त था। वो “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ…हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की सेक्सी आवाजे निकाल रही थी। उसकी कुवारी चूत की झिल्ली मुझे दिख रही थी। मैं तो जल्दी जल्दी बुर चाट रहा था। अंशिका की कमर आगे पीछे हो रही थी। साफ था की उसकी चूत में भूचाल आ गया है।वो कसमसा रही थी। बार बार अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी। अंशिका अपना सिर उठाकर अपनी चूत की तरफ ही देख रही थी पर उसे कुछ










