ओह… मेरे शरीर में चीटियाँ सी दौड़ रही हैं… उफ… वह टूटते शब्दों में कह उठा, मैनें उसके हांथों को अपने स्तनों पर टिका दिया और बोली- इनसे खेलते रहो… और फिर उसके लिंग को अपनी जीभ से तरासने लगी.मेरे पति एक कटोरी में सरसों का तेल ले आये और मेरी एक टांग को ऊँचा करके मेरी गुदा (गांड) में तेल लगाने लगे.अब अपने जीजाजी के पास चले जाओ… मैनें अपने मुंह से अपने भाई का लिंग निकाल कर उससे कहा, वह यंत्र की भांति चुपचाप मेरे पति के निकट जाकर बैठ गया. XXX BF उफ… उफ… आरुषी ने भीतर आते ही रंगीन मजाक आरंभ कर दिये, मेरे महकते रूप की तारीफ़ करने लगी, मैं समझ गई की लड़की प्यासी है, मेरी बातों को… उफ… उफ… आहिस्ता आहिस्ता चूसिये इन्हें… आप तो पागल हुवे जा रहे हैं उफ…मेरे पति पागलों की भांति ही मेरे स्तनों का दोहन सा कर रहे थे, मेरे होंठों से सिसकारियां फूटने लगी थी, ऐसा लग रहा था जैसे नाभि में कोई तूफ़ान अंगडाई लेने लगा है, मैनें उत्तेजना से उत्तपन होने वाली सिसकारियों को अपने दांतों तले दबा कर एक लंबी सांस छोड़ी फिर कहना शुरू किया, आरुषी को मैं चाय बनाने के लिए अपने साथ रसोई में ले गई तो उसने… उफ… ऑफ… ओफ्फो…क्या कर रहे हैं आप….?










