मैं दायीं करवट लेटी हुई थी, तभी मुझे लगा कि कोई मेरे बिस्तर पर आकर मेरे पीछे लेट गया है, वो दीनदयाल के सिवा और कोई नहीं था. मैं सीधी लेती हुई थी मुझे अपनी सांसों में शराब की गंध आई शायद वो मेरे चेहरे के बहुत करीब था और फिर मेने अपने होंठों पर बहुत धीरे से चुम्बन महसूस किया, मेरा बेटा मुझे चूम रहा था मेरे तन बदन में काम वासना भड़कने लगी, मैं बिलकुल अनजान बन कर लेटी हुई थी.मुझे करीब ६ साल से काम सुख नहीं मिला था एक बार मेरा मन हुआ की मैं उसके हाथ पकड़ कर उसके एक चांटा मारूं लेकिन फिर मैने सोचा की ये जवान तगड़ा लड़का है और काम वासना में जल रहा है यह अपनी प्यास तो मेरे बदन से बुझा ही लेगा अगर उसके बाद मैं इसे डाँटूंगी तो यह घर छोड़ कर जा सकता है इस कमजोरी ने मेरे हाथ बांध दिए।मेर हालत ऐसी थी की मुझे भी मर्द की जरुरत महसूस हो रही थी जो बात मैं अपने बेटे से कभी न कह सकी वो ही इच्छा मेरा बेटा पूरी करने वाला था, फिर मैने महसूस किया की वो मेरे ब्लाउज का ऊपरी बटन खोलने में लगा था, और तभी उसने अंदर हथेली डाल कर मेरी दायीं दुद्दी धीरे से मसल दी.शायद वो भी इस बात को समझ रहा था की मैं सोने का















