मै वही किनारे जाकर बैठ गया और काकी को घूरने लगा।काकी – बेटवा तेरी उंगली तो ठीक है ना.मै – हा काकी खून नही बह रहा लेकिन दर्द है.काकी – अरे बेटवा मेरी ही गलती है जो तुझ शहरी बाबू से फसल कटवाने जा रही थी.मै- नही काकी ऐसी बात नही है मै काट लेता फसल लेकिन ये चोट लग गई.और उठकर उनके सामने जाकर बैठ गया और उनकी चुचियो को खा जाने वाली नजरो से देखने लगा. XXX BF दोनो बेटो की शादी हो चुकी है.चन्दन पैसे कमाने के सिलसिले मे बैंगलोर रहता है ओर रौशन यही गांव रहकर माँ पत्नी और भाभी की देखभाल करता है। रौशन बहुत मेहनती है खेती का काम करने के साथ साथ गांव से थोडी दूर मार्केट जाकर छोटी सी नोकरी करता है। सुबह उठकर खेतो मे काम करना फिर नौ बजते ही नोकरी पर चले जाना।चन्दन की बीवी(ज्योति) दिखने मे दिव्या भारती की तरह थी फीगर अंदाजन 34 28 36 होगा। गोरा रंग छलकती जवानी जाहिर सी बात है पति बैंगलोर मे था तो लंड की प्यास तो होगी ही होठो के पास एक तील था जो उसकी हर मुस्कान पर लंड खडा कर देता था रौशन की पत्नी (रीमा)बहुत संस्कारी थी पूजा-अर्चना करने मे ही व्यस्त रहती थी कोई पराया मर्द अगर उसपर नजर भी डाले तो उसकी खैर नही।अब चाचाजी का परिवार नाम-अर्जुन कुमार,















