आप तो कह रहे हो मोज़े ढूंढने हैं?”अब वो शर्मा रही थी या शर्माने का दिखावा कर रही थी, ये तो वही जाने।मैंने अपने लंड को पकड़ कर हिला कर कहा, “मोज़े भी ढूंढ लेंगे। ये भी कुछ ढूंढ रहा है”।वंदना उठने लगी और बोली, “बड़े खराब हो साहब आप। मैं चलती हूं।”अब पहली बार में तो औरत मानती भी नहीं। कुछ तो न नुकुर करती ही है।मैंने वंदना के कंधे पर हाथ रख कर कहा, “क्या हुआ? XXXBF ऐसा क्या इन झांटों के बालों में।”वंदना हंस कर बोली, “साहब एक बार सूंघ कर देखो। इन झांटों की खुशबू और चूत के स्वाद से ही मर्दों के लंड खड़े हो जाते हैं”।फिर बात जारी रखते हुए बोली, “साहब एक बात बोलूं ? तम्हारा मतलब कॉप्पर टी”?वंदना बोले, “हां साहब वही जो आप कह रहे हैं। कालोनी की तकरीबन सभी औरतों ने ये लगवाई हुई है। खुल के चुदाई करवाओ, कोइ झंझट नहीं”।बस तो अब वंदना की चुदाई रह गयी थी – मगर नहीं। अभी वंदना ने ज्ञान की कुछ और बातें भी बतानी थीं। जैसे ही मैं लंड वंदना की चूत में डालने लगा, मुझे लगा वंदना के चूत बिलकुल सूखी है। चूत ने पानी तो छोड़ा ही नहीं जो अक्सर लड़कियों की चूत चुदाई के ख्याल से ही छोड़ देती हैं।मैंने वंदना को पूछा, “क्या बात है वंदना, चूत अभी लंड लेने















